पितृ पक्ष शुरू होने वाले हैं
सार
पंडित राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि हर साल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भाद्रपद महीने के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृपक्ष का आरंभ होता है और यह पितृपक्ष आश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलता है।
विस्तार
हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व है। पितृ पक्ष पितरों और पितरों की शांति और खुशी के लिए मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से श्राद्ध और पिंडदान करने की परंपरा है। रे पंडित राजेंद्र शास्त्री ने बताया कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार हर साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा से पितृ पक्ष शुरू होता है। यह आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलता है। 29 सितंबर, शुक्रवार से पितृ पक्ष शुरू हो जाएगा। वही कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि 14 अक्टूबर को समाप्त होगी।
पितृ पक्ष का महत्व
Pitru Paksha" में पूर्वजों और पितरों के लिए विशेष महत्व होता है। इस दिन माना जाता है कि मृत्यु लोक से पितर धरती पर आते हैं। इसलिए Pitru Paksha के दौरान तर्पण और श्राद्ध करके हम पितरों को खुश कर सकते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं। इस दौरान तिथियों के अनुसार पितरों का श्राद्ध करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा, पितृ दोष से मुक्ति और पितरों की शांति के लिए हमें Pitru Paksha पर दान करना और ब्राह्मणों को भोजन कराना चाहिए।
पितृ पक्ष 2023 तिथि (Pitry Paksha 2023 Tithiyan)
प्रतिपदा तिथि प्रारंभ- सितंबर 29, 2023 को दोपहर 03 बजकर 26 मिनट से
प्रतिपदा तिथि समाप्त- सितंबर 30, 2023 को दोपहर 12 बजकर 21 मिनट तक
पितृ पक्ष में श्राद्ध की तिथियां (Pitra Paksha tithi)
29 सितंबर: पूर्णिमा श्राद्ध
30 सितंबर: प्रतिपदा और द्वितीया श्राद्ध
1 अक्टूबर: तृतीया श्राद्ध
2 अक्टूबर: चतुर्थी श्राद्ध
3 अक्टूबर: पंचमी श्राद्ध
4 अक्टूबर: षष्ठी श्राद्ध
5 अक्टूबर: सप्तमी श्राद्ध
6 अक्टूबर: अष्टमी श्राद्ध
7 अक्टूबर: नवमी श्राद्ध
8 अक्टूबर: दशमी श्राद्ध
9 अक्टूबर: एकादशी श्राद्ध
11 अक्टूबर: द्वादशी श्राद्ध
12 अक्टूबर: त्रयोदशी श्राद्ध
13 अक्टूबर: चतुर्दशी श्राद्ध
14 अक्टूबर: सर्व पितृ अमावस्या श्राद्ध
पितृ पक्ष के दौरान आपको कुछ विशेष सावधानियाँ बरतनी चाहिए। निम्नलिखित है कुछ ऐसी बातें जिन्हें आपको नहीं करनी चाहिए:
1. नई कोई शुरुआत न करें:
पितृ पक्ष के दौरान नई शुरुआतें न करें, जैसे कि विवाह या नया व्यापार।
2. नए कपड़े न पहनें:
नए कपड़े पहनने से बचें, इसे तब करें जब पितृ पक्ष खत्म हो जाए।
3. नए निवेश न करें:
पितृ पक्ष के दौरान नए निवेश नहीं करें, वित्तीय लेन-देन में सावधानी बरतें।
4. अशुभ काम न करें:
इस समय अशुभ काम जैसे कि धन लेन-देन, खुदाई, और अपशकुन कार्य नहीं करें।
5. माँस खाना न खाएं:
पितृ पक्ष में माँस नहीं खाना चाहिए, आपको शाकाहारी भोजन का पालन करना चाहिए।
6. श्राद्ध न छोड़ें:
पितृ पक्ष में पितरों के लिए श्राद्ध का आयोजन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसे न छोड़ें।
7. अधिक शोक न करें:
पितृ पक्ष में अधिक शोक नहीं करें, यह सावधानी बरतें और सकारात्मक भावनाओं के साथ रहें।
8. गाय का दुध न बेचें:
इस समय गाय का दुध न बेचें, यह भी एक प्रकार की दान का माना जाता
है।
9. किसी से झगड़ा न करें:
पितृ पक्ष में किसी से झगड़ा नहीं करें, और शांति और सहमति के साथ जीवन जिएं।
10. दुखद समाचार न सुनें:
इस समय दुखद समाचार सुनने से बचें, और मन को शांत रखें।
पितृ पक्ष के दौरान इन बातों का पालन करके आप श्रद्धा भावना से इस महत्वपूर्ण अवसर का सम्मान कर सकते हैं।
(अस्वीकरण: सलाह सहित यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी प्रदान करती है. यह किसी भी तरह से योग्य चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है. अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श करें. एनडीटीवी इस जानकारी के लिए ज़िम्मेदारी का दावा नहीं करता है.)
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